22 अप्रैल 2022

मार्केट न्यूज़

फ़्रेंच चुनाव की गर्मी बढ़ गई है: आपको ये सब जानकारी होनी चाहिए

फ़्रांस में राष्ट्रपति का चुनाव अच्छे से चल रहा है और इसी के साथ, यूरोप में राजनीतिक लोकतंत्र का भविष्य सामने आ रहा है। वोटिंग के आखिरी राउंड में, मौजूदा राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रॉन (27.8% वोट) ने दक्षिणपंथी लीडर मरीन ले पेन (23.2% वोट) को हराकर पहला स्थान हासिल किया था। हालाँकि, चुनाव यह संकेत ज़रूर देते हैं कि वे आने वाले रविवार 24 अप्रैल को राष्ट्रपति बने रहेंगे, फिर भी पहले राउंड के परिणाम दर्शाते हैं कि उनकी जीत अभी सुरक्षित नहीं है। दरअसल, चुनाव यह दर्शाते हैं कि 5 साल पहले के चुनाव की तुलना में इस बार परिणाम काफ़ी नजदीकी रहने वाले हैं। यह स्पष्ट जीत से बहुत दूर की बात होगी।

स्रोत: Politico research
स्रोत: Politico research

फिर भी, थोड़ी सी ही सही, मैक्रॉन को बढ़त हासिल हुई है और ऐसा लगता है कि राष्ट्रपति के तौर पर वे वॉल स्ट्रीट के पसंदीदा हैं। न केवल उन्हें व्यवसाय के लिए ज़्यादा सही माना जाता है, बल्कि अतीत में वे बैंकिंग से भी जुड़े हुए थे, जबकि अपने नाटकीय नज़रिए और एजेंडे के कारण ले पेन बाज़ार में दिक्कत पैदा कर सकती हैं।

इस चुनाव में मैक्रॉन का एजेंडा है- श्रमिक बाज़ार विकसित करना, कॉर्पोरेट टैक्स कम करना और यूरोप के साथ अधिक जुड़ाव पैदा करना।

मैक्रॉन के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने का मतलब होगा, वित्तीय बाज़ारों पर सीमित प्रभाव, क्योंकि इससे स्थिरता बनी रहेगी, लेकिन दीर्घकालिक तौर पर उनके कार्यकाल से विकास को बढ़ावा मिलेगा। दूसरी तरफ़, अगर ले पेन जीतती हैं, तो इससे बाज़ार में डर का माहौल बनेगा। 

वोटिंग के दूसरे दौर की ओर बढ़ते हुए, हमें इन संपत्तियों पर नज़र रखनी चाहिए:

EURUSD

शेष यूरोप की तुलना में, मैक्रॉन के नेतृत्व में फ़्रेंच बाज़ारों ने बेहतर प्रदर्शन किया था। अगर वे चुनाव फिर से जीत जाते हैं, तो बाज़ार प्रतिभागी इसी दौर के जारी रहने की उम्मीद कर रहे हैं।

चूँकि फ़्रांस यूरोपीय यूनियन की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, इसलिए राजनीति में उथल-पुथल की संभावना से यूरो पर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे समय में, यूरो लेने में शामिल जोखिम को समझने के लिए, बस किसी को ऑप्शन बाज़ार पर एक नज़र डालनी होगी। पिछले हफ़्ते मुद्रा में हुई गिरावट से सुरक्षा के लिए हेजिंग कीमतों में मार्च के मध्य से लेकर अभी तक का सबसे बड़ा इजाफ़ा है। संस्थागत निवेशकों और हेज़ फ़ंड के हालिया सर्वेक्षण ने दिखाया है कि यूरो शॉर्ट करने की संभावना बढ़ गई है। इसके अलावा फ़ेडरल रिज़र्व और उसकी कठोर नीति के कारण गिरावट की ओर एक दबाव बना हुआ है।

कुछ समय से यूरो का ट्रेंड गिरावट की ओर है और राजनीतिक जगत में कोई भी अनिश्चितता होने पर इस साझी मुद्रा को कोई फ़ायदा नहीं मिलेगा। इसकी संभावना ज़्यादा है कि फँसे हुए केंद्रीय बैंक के हाथों, यूरो को कठिन परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ेगा, लेकिन अपनी दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता के कारण इसके गिरने की संभावना और ज़्यादा बढ़ जाएगी।

EURGBP

काफ़ी समय से ब्रिटिश पाउंड की तुलना में यूरो में गिरावट दर्ज की जा रही है और इसमें तेज़ी के कोई खास आसार नहीं दिख रहे। अगर चुनाव में किसी प्रकार का झटका लगता है, तो शुरुआती "स्वाभाविक प्रतिक्रिया" यही होगी कि यूरो के विरुद्ध स्टर्लिंग मज़बूत हो जाएगा, जिससे मुद्रा 0.82 के स्तर से नीचे जा सकती है, एक ऐसा क्षेत्र जो 2016 के मध्य से ही यूरो के लिए एक ठोस समर्थन क्षेत्र रहा है। इस संभावित प्रतिक्रिया को बढ़ावा देने वाली एक और परिस्थिति यह है कि हाल-फ़िलहाल में ब्रिटिश पाउंड यूरो की तुलना में अधिक स्थिर रहा है।

ध्यान रखें, कि बैंक ऑफ़ इंग्लैंड यह बताता रहता है कि वे मुद्रास्फ़ीति के विरुद्ध काम करते रहेंगे, जबकि यूरोपीय यूनियन इस मुद्दे पर ज़्यादा कठिन परिस्थिति में रहा है। बेशक ऊर्जा की कमी, चिंता का एक गंभीर मुद्दा रहेगा क्योंकि रूस से आयात की जाने वाली प्राकृतिक गैस बहुत कम हो गई है और एक पॉइंट पर आकर रुक भी गई है।

ऊर्जा

हाल-फ़िलहाल जब यूरोप प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को लेकर संघर्ष कर रहा है, तो ऊर्जा सेक्टर में सबसे तेज़ प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। यूक्रेन में चल रहे टकराव के दौरान यूरोप रूसी गैस में कटौती कर रहा है और जर्मनी ने तो यह सुझाव भी दिया है कि हो सकता है कोयले पर वापस लौटना पड़े। मरीन ले पेन ने पहले सुझाया था कि पवन ऊर्जा पर प्रतिबंध लगाने का काम वे सबसे पहले करेंगी। इसके अलावा वे ग्रीन एनर्जी को मिलने वाली सारी सब्सिडी पर प्रतिबंध लगाएँगी।

इस बात की पूरी संभावना है कि मरीन ले पेन को इमेनुएल मैक्रॉन की तुलना में पारंपरिक हाईड्रोकार्बन के प्रति अधिक "अनुकूल" देखा जाएगा। इससे ऊर्जा की बढ़ोतरी में एक और बूस्ट मिलेगा। 

इसी दौरान, मैक्रॉन की विजय से भी ऊर्जा को बूस्ट मिल सकता है, क्योंकि वे 14 और न्यूक्लियर रिएक्टर बनाने के पक्ष में हैं ताकि इस सेक्टर को ज़्यादा स्वतंत्रता मिल सके। कहा जा रहा है कि इस दौड़ के कठिन होने के काफ़ी पहले से ऊर्जा बाज़ार में तेज़ी देखी गई थी, लेकिन यह दौड़ गैसोलीन में प्रचंड तेज़ी ला सकती है।

सारांश

यह चुनाव प्रत्यक्ष रूप से 2017 के मैक्रॉन-ले पेन के द्वन्द जैसा दिख सकता है, लेकिन वास्तव में यह बहुत अलग है। इस तथ्य से कि ले पेन वोट के मामले में कड़ी टक्कर दे रही हैं, यह बात जाहिर होती है कि फ़्रेंच लोगों की राय क्या है। बाज़ार के लिए परिणाम के क्या मायने होंगे? अगर मैक्रॉन जीतते हैं, तो इसका मतलब होगा स्थिरता और आज की यथास्थिति का जारी रहना और इसलिए बाज़ार पर इसका प्रभाव सीमित होगा। लेकिन अगर ले पेन राष्ट्रपति बनती हैं, तो हमें ऊपर बताए गए सेक्टर में और निस्संदेह फ़्रेंच स्टॉक और इंडेक्स में बहुत अधिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है।

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