21 दिसम्बर 2021

बाजार का विश्लेषण

2022 में और उसके बाद क्रूड ऑयल की कीमतें: खरीदें या बेचें?

जब वैश्विक महामारी पूरी दुनिया में आपूर्ति और माँग को जोखिम में डाल रही थी, तो क्रूड ऑयल बाज़ारों ने 2021 में एक और उतार-चढ़ाव भरे वर्ष का सामना किया। 

जबकि ओमिक्रॉन वेरियेंट पर बनी हुई अनिश्चितता, ऑयल की अस्थिरता का प्रमुख कारक बनी हुई है, फिर भी यूएस एनर्जी इन्फ़ोर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा जारी किया गया हालिया डेटा, हर जगह तेज़ी दर्शा रहा है, जो कि यह दिखाता है कि इंवेंट्री विश्लेषकों के अनुमान से कम होने के बाद, खपत रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँच गई है।

तो 2022 में ऑयल के लिए नज़रिया क्या रहेगा? क्या वैश्विक ऑयल बेंचमार्क वर्ष-दर-वर्ष की वृद्धि पर बने रहेंगे या इसकी वापसी धीमी पड़ जाएगी?

बाज़ार की मौजूदा स्थिति

26 नवंबर को जब ओमिक्रॉन स्ट्रेन की आधिकारिक घोषणा हुई थी, तब ऑयल की कीमतें 13% से ज़्यादा गिर गई थीं। यह कई सालों में सबसे बड़ी गिरावट थी और यह स्पष्ट तौर पर लॉकडाउन, यात्रा प्रतिबंधों और उत्पादन में कमी के एक और दौर के प्रति बाज़ार की बेचैनी दर्शाती है।

हालाँकि, मौजूदा निराशाजनक नज़रिए के बावजूद, ऑयल बेंचमार्क 2021 में लंबे समय तक अपट्रेंड बनाए हुए थे। USOIL और UKOIL, क्रमशः $71 और $74 पर ट्रेड किए जा रहे हैं – जो कि इस साल की शुरुआत की तुलना में 51% और 46% अधिक है।

माना कि ओमिक्रॉन वेरियेंट ने वैश्विक आर्थिक रिकवरी के बारे में फिर से डर पैदा कर दिया है, लेकिन अब तक की रिपोर्टें दर्शा रही हैं कि यह उतना चिंताजनक नहीं है जितना कि सोचा गया था और वित्तीय बाज़ारों पर इसका प्रभाव कम रहने के आसार हैं। 

अस्थिरता के कारक

पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) ने 2022 की पहली तिमाही के लिए वैश्विक ऑयल माँग के अनुमान के आँकड़ों में बढ़ोतरी की है और अनुमान लगाया है कि खपत वैश्विक महामारी के पहले के स्तरों पर पहुँच जाएगी, जो कि प्रतिदिन एक मिलियन बैरल से अधिक होगी। 

बढ़ी हुई आपूर्ति ऑयल की कीमतों पर दबाव डालती है और अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था पहली तिमाही में बाज़ार की अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर पाती, तो इसकी संभावना ज़्यादा है कि मंदड़िए इस गिरावट का फ़ायदा उठाएँगे। 

अभी तक, OPEC और उसके सहयोगी ऑयल उत्पादन के संबंध में अपनी योजनाओं को लेकर डटे हुए हैं - जनवरी 2022 में उत्पादन 400,000 बैरल तक पहुँच जाएगा। 

सीधी सी बात है कि इसका मतलब यह नहीं है कि बाज़ार खतरे से बाहर है, क्योंकि अब भी बहुत सारे जोखिम और रुकावटें बरकरार हैं। कोरोनावायरस के उतार-चढ़ाव को छोड़कर, डॉलर की मज़बूती एक और कारक है जिसने ऑयल की कीमतों को बहुत ज़्यादा प्रभावित किया है। 

ख़ासतौर से यूएस में मुद्रास्फीति निरंतर बढ़ रही है और निरंतर कॉल टू एक्शन के कारण, फ़ेडरल रिज़र्व ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि वह इस स्टिमुलस कार्यक्रम को उम्मीद से ज़्यादा तेज़ी से टेपर करता रहेगा।

यह इस बात को उजागर करता है कि फ़ेड भी अगले साल होने वाली मुद्रास्फीति को लेकर चिंतित है और अधिकारी 2022 में कम से कम तीन बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने की योजना बना रहे हैं।

अधिक ब्याज दरों का मतलब है अधिक मुनाफ़ा, जिसका मतलब है कि यह मुद्रा विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक होगी और इससे इस मुद्रा की माँग में हुई बढ़ोतरी के कारण विनिमय दर डॉलर के अनुकूल हो जाएगी। 

हालाँकि अधिकतर समय, सोने और ऑयल जैसी कमोडिटी की कीमतें अमेरिकी डॉलर से परस्पर विपरीत तौर पर संबंधित हैं। चूँकि क्रूड ऑयल को अमेरिकी डॉलर में खरीदा या बेचा जाता है, इसलिए कमज़ोर डॉलर का मतलब होगा कि आयात करने वाले को अपने ऑयल बैरल खरीदने के लिए अधिक डॉलर खर्च करने होंगे। हालाँकि, मज़बूत डॉलर के चलते, कम डॉलर में अधिक बैरल मिलेंगे। 

संक्षेप में कहें, तो जब अमेरिकी डॉलर बढ़ता है, तो ऑयल की कीमतें कम होती हैं और जब घटता है तो कीमतें ज़्यादा हो जाती हैं। और बढ़ती ब्याज दरों के कारण पूरे 2022 में ऑयल की कीमतों पर दबाव बना रहेगा। 

सार: खरीदार सावधान रहें

अगर पिछले दो साल कोई संकेत दे रहे हैं, तो बाज़ार के प्रतिभागियों को 2022 में और अधिक अस्थिरता के लिए तैयार रहना चाहिए। दरअसल, नया साल और अधिक अनिश्चित साबित हो सकता है और बाज़ार इस अनिश्चितता के दौर में और अधिक अस्थिरता दिखा सकते हैं।

हालाँकि वैश्विक ऑयल बेंचमार्क अपने महामारी-पूर्व स्तरों पर अब भी बरकरार हैं, फिर भी ऐसी कुछ बाहरी ताकते हैं जो बाज़ार को किसी भी दिशा में ले जा सकती हैं।

अगर वैश्विक आर्थिक विकास अपनी राह पर बना रहा है, तो रिकवरी से ऑयल कीमतों को समर्थन मिलेगा, लेकिन इस समय कोई भी दीर्घकालिक अनुमान लगाना बहुत ज़्यादा अविश्वसनीय हो सकता है। 

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